ढाई साल की बच्ची का बलात्कार। पांच साल की बच्ची का गैंग रेप। सात साल की बच्ची
का स्कूल में रेप। किरायदार ने छह साल की बच्ची का बलात्कार किया। टीचर ने किया
स्कूल में बच्ची से बलात्कार। वैन ड्राइवर ने बच्चे से जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध
बनाया।
ऐसी हर घटना में दो चीजें कॉमन हैं, बच्चे और बलात्कार। हर घटना में बलात्कारी की शख्ल बदल जाती है लेकिन बच्चे और बलात्कार... वैसे ही रहते हैं।
दो और चीजें कॉमन रहतीं हैं... एक तो है तरीका कि...
अंकल ने बैलून लेने के लिए बुलाया। भैया बुलाकर ले गए। अंकल ने कहा मिठाई दूंगा. वगैरह, वगैरह, वगैरह।
और सबसे कॉमन जो चीज है वो है, अनदेखी, अवहेलना, लापरवाही।
उन लोगों की लापरवाही, उन माता-पिता की... जो घटना के बाद सरोकार से लबरेज, कुछ भी कर गुजरने के लिए बेचैन दिखते हैं कि ....
ऐसी हर घटना में दो चीजें कॉमन हैं, बच्चे और बलात्कार। हर घटना में बलात्कारी की शख्ल बदल जाती है लेकिन बच्चे और बलात्कार... वैसे ही रहते हैं।
दो और चीजें कॉमन रहतीं हैं... एक तो है तरीका कि...
अंकल ने बैलून लेने के लिए बुलाया। भैया बुलाकर ले गए। अंकल ने कहा मिठाई दूंगा. वगैरह, वगैरह, वगैरह।
और सबसे कॉमन जो चीज है वो है, अनदेखी, अवहेलना, लापरवाही।
उन लोगों की लापरवाही, उन माता-पिता की... जो घटना के बाद सरोकार से लबरेज, कुछ भी कर गुजरने के लिए बेचैन दिखते हैं कि ....
माता-पिता और रिश्तेदारों ने रोष में सड़क जमा किया, घेराव किया।
गुनाहगारों को पकड़ने सजा देने के लिए आंदोलन कर रहे।
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छोटी बच्चियों के मामले में गुनाहगार कौन है?
शायद वो बच्चियां...
उन्होंने अश्लील कपड़े पहने थे? उन्होंने भडकाऊ ड्रेस पहन रखा था? जीन्स और हॉट पैंट में घूम रहीं थी? हां वो बच्चियां ही जिम्मेदार है...
उन्होंने अश्लील कपड़े पहने थे? उन्होंने भडकाऊ ड्रेस पहन रखा था? जीन्स और हॉट पैंट में घूम रहीं थी? हां वो बच्चियां ही जिम्मेदार है...
या फिर बलात्कारी? जिसकी मानसिकता खराब थी। जो मनोविकार का शिकार था... नहीं
क्या? ये बलात्कारी ही दोषी था।
लेकिन मां-बाप... उनके दोष का क्या?
असल अपराधी तो ये लोग हैं... सजा इन्हें मिलनी चाहिए।
बच्चे इनकी अनदेखी, इनकी लापरवाही, इनकी अवहेलना से भेड़ियों और गिद्ध के हाथों पड़ जाते हैं।
चूहे के बच्चे को कौवा ले गया। मेमने को भेड़िया उठा ले गया। खरगोश के बच्चे को चील ले उड़ी। इन सबमें कौवा, भेड़िया और चील जिम्मेदार है? या कौवे की मां, खरगोश की मां और मेमने की मां जिसने बच्चों को अकेला इस दशा में छोड़ दिया कि उनका शिकार कर लिया जाए।
असल अपराधी तो ये लोग हैं... सजा इन्हें मिलनी चाहिए।
बच्चे इनकी अनदेखी, इनकी लापरवाही, इनकी अवहेलना से भेड़ियों और गिद्ध के हाथों पड़ जाते हैं।
चूहे के बच्चे को कौवा ले गया। मेमने को भेड़िया उठा ले गया। खरगोश के बच्चे को चील ले उड़ी। इन सबमें कौवा, भेड़िया और चील जिम्मेदार है? या कौवे की मां, खरगोश की मां और मेमने की मां जिसने बच्चों को अकेला इस दशा में छोड़ दिया कि उनका शिकार कर लिया जाए।
तो बच्चों के इस दशा में पहुंचाने का रास्ता बनानेवालें इन मूर्ख माता-पिताओं
का क्या किया जाना चाहिए...जो अपने जीवन में गोबर के चोत की तरफ ऐसे पसरे हुए हुए
रहते हैं कि उन्हें बच्चों की सुरक्षा की परवाह ही नहीं रहती। वो अपनी ही दुनिया
में ऐसे मस्त रहते हैं कि सुरक्षा के लिए दिए गए बच्चों के इशारों को भी उनकी जिद
और बचपना समझते हैं।
समाज, ऐसे चंठों से भरा पड़ा है, जो अपने बच्चों को असुरक्षित छोड़ अपने पडोसियों से
चोचलेबाजी में मशगूल रहते हैं। अपनी दुनिया में वो ऐसे खोये रहते हैं कि बच्चों की
सुरक्षा की जरा भी परवाह नहीं रहती उनको।
बच्चे ही जीवन की सबसे जरूरी प्राथमिकता हैं... उनकी सुरक्षा हर जीव की पहली और इकलौती कुदरती जिम्मेदारी है। उनके प्रति ऐसी लापरवाही.. कि कोई उनको फुसला ले जाए, उनका बलात्कार कर ले और मां-बाप को उनकी लाश मिले।
इसकी सजा तो मां-बाप को मिलनी चाहिए ना...?
बच्चे ही जीवन की सबसे जरूरी प्राथमिकता हैं... उनकी सुरक्षा हर जीव की पहली और इकलौती कुदरती जिम्मेदारी है। उनके प्रति ऐसी लापरवाही.. कि कोई उनको फुसला ले जाए, उनका बलात्कार कर ले और मां-बाप को उनकी लाश मिले।
इसकी सजा तो मां-बाप को मिलनी चाहिए ना...?
हां, बच्चों के साथ हुई किसी भी अनहोनी में.. सबसे ज्यादा दोषी ये मां-बाप
हैं। हर बार जब भी कोई मां-बाप छोटी बच्ची-बच्चे के साथ ऐसे अपराध की शिकायत लेकर
आए तो उनसे पूछिए... आपको पता चलेगा कि शुरूआत उनकी लापरवाही से हुई थी।
तो उन्होंने अपनी मस्त दुनिया में मशगूल रहकर अपने बच्चों को बलात्कारी के हवाले कर दिया कि जा मजे कर। ये रवैया ठी नहीं है।
बच्चों की ये दशा उनके अभिभावकों की अनदेखी और लापरवाहियों के वजह से ही हो रही हैं, होती हैं। सजग, और चौकस माता-पिता के बच्चे कभी भी ऐसे हादसों के शिकार नहीं होंगे। बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बच्चों की खुद नहीं, उनके मां-बाप की है। अगर बच्चे असुरक्षा के शिकार होते हैं, सबसे पहला और सबसे बड़ा अपराधी उनके माता-पिता और अभिभावक हैं। सजा उन्हें भी मिलना चाहिए और बहुत की कड़ीसजा, बलात्कारियों से भी ज्यादा कड़ी सजा। तभी बच्चे जनमा कर उसे शोषकों के हवाले करनेवाले ऐसे मूर्ख और स्वार्थी माता पिता को अक्ल आएगी
ऐसे हादसों के शिकार बच्चों पर दया आती है, सहानुभूति होती है, अफसोस होता है कि ईश्वर ने इन्हें किस अपराध की सजा दी कि ऐसे मां-बाप के यहां पैदा किया जो इनका ध्यान नहीं रख पाए। जिन्हें इन बच्चों की जरूरत ही नहीं थी...
...तभी तो अभी जब किसी भेड़िए ने मासूम को चीड़ दिया तब हंगामा कर रहे हैं लेकिन भेड़िए को ऐसा मौका किसने दिया? किसने वैसे असुरक्षित अवसर पैदा किए कि कोई भेड़िया बच्चों को उठा ले जाए। किसने अपने मासूमों को उनके हवाले किया?
बच्चों के साथ यौन अपराध और बड़ों के साथ यौन अपराध देखने में एक सा लगता हो, दोनों की बुनियाद में ही बड़ा फर्क है, बाकी चीजों में तो है ही।
चोरी के लिए जितना चोर जिम्मेदार होता है, उतनी ही जवाबदेही पहरेदार की भी होती है।
तो उन्होंने अपनी मस्त दुनिया में मशगूल रहकर अपने बच्चों को बलात्कारी के हवाले कर दिया कि जा मजे कर। ये रवैया ठी नहीं है।
बच्चों की ये दशा उनके अभिभावकों की अनदेखी और लापरवाहियों के वजह से ही हो रही हैं, होती हैं। सजग, और चौकस माता-पिता के बच्चे कभी भी ऐसे हादसों के शिकार नहीं होंगे। बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बच्चों की खुद नहीं, उनके मां-बाप की है। अगर बच्चे असुरक्षा के शिकार होते हैं, सबसे पहला और सबसे बड़ा अपराधी उनके माता-पिता और अभिभावक हैं। सजा उन्हें भी मिलना चाहिए और बहुत की कड़ीसजा, बलात्कारियों से भी ज्यादा कड़ी सजा। तभी बच्चे जनमा कर उसे शोषकों के हवाले करनेवाले ऐसे मूर्ख और स्वार्थी माता पिता को अक्ल आएगी
ऐसे हादसों के शिकार बच्चों पर दया आती है, सहानुभूति होती है, अफसोस होता है कि ईश्वर ने इन्हें किस अपराध की सजा दी कि ऐसे मां-बाप के यहां पैदा किया जो इनका ध्यान नहीं रख पाए। जिन्हें इन बच्चों की जरूरत ही नहीं थी...
...तभी तो अभी जब किसी भेड़िए ने मासूम को चीड़ दिया तब हंगामा कर रहे हैं लेकिन भेड़िए को ऐसा मौका किसने दिया? किसने वैसे असुरक्षित अवसर पैदा किए कि कोई भेड़िया बच्चों को उठा ले जाए। किसने अपने मासूमों को उनके हवाले किया?
बच्चों के साथ यौन अपराध और बड़ों के साथ यौन अपराध देखने में एक सा लगता हो, दोनों की बुनियाद में ही बड़ा फर्क है, बाकी चीजों में तो है ही।
चोरी के लिए जितना चोर जिम्मेदार होता है, उतनी ही जवाबदेही पहरेदार की भी होती है।

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