जमानत भी गंवा चुके हैं वो-
कौन हैं सलमान खुर्शीद? हैं क्या वो? वो विदेश मंत्री थे, अभी हैं नहीं। अभी उनकी हैसीयत एक आम शहरी की तरह है। पिछले चुनाव में जमानत भी नहीं बचा पाए अपनी। तो उनकी बातों का, उनके कथन का कोई अर्थ नहीं। बकवास है वो... ! ठीक वैसे ही जैसे अरुण जेटली की सारी बातें बकवास होती हैं, होनी चाहिए।
पाकिस्तानी मीडिया पर भरोसा करें?
जिन्ना इंस्टीट्यूट क्या है? तक्षशिला है क्या वो?
जिन्ना इंस्टीट्यूट की वेबसाईट ही ऐलान करती है कि अपने बेव पर शेयर की गई जानकारियों के लिए वो जवाबदेह नहीं है। अब ऐसे इंस्टीट्यूट में कोई सालाना बहस हो और पाकिस्तानी मीडिया... 'पाकिस्तानी' मतलब 'पाकिस्तानी' मीडिया, जो भारत की मीडिया से ही सबक लेती है। तो वो उससे भी गई बीती है... वो मीडिया उस बहस का मंत्रोच्चारण करने लगती है...
...तो उस मीडिया ने जिस बकवास को विद्वता का ज्ञान पेश किया, उस बकवास को भारत के प्रधानमंत्री के वक्तव्य के समकक्ष रख, आप प्रधानमंत्री के कथन का जस्टिफिकेशन नहीं कर सकते है।
बकवास करते हैं खुर्शीद -
सलमान खुर्शीद का कोई भी कथन हो, वो तथ्य नहीं बकवास है...
वो उसी खेत की पैदाइश हैं, जिसमें मोदी पैदा हुए है। भारतीय राजनीति ऐसी ही है... वो सलमान खुर्शीद और नरेंद्र दामोदर मोदी ही पैदा कर सकती है। पर मोदी, इस वक्त भारत के प्रधानमंत्री हैं... वो उनके कथन में वजन होना चाहिए। खुर्शीद की फूहड़ता, उनकी बकवास से मोदी के कथन तुलना अभी इस वक्त दुरुस्त नहीं है। वैसे दोनों बोलते एक जैसे ही रहे हैं।
47 से आजतक होता क्या रहा -
खुर्शीद के हजारों बकवास में एक बकवास है कि 47 से भारत पाकिस्तान संबंध सुधरा नहीं... तो कौन दोषी है? कांग्रेस सरकारें क्या करती रहीं आज तक? इतना घुसपैठ आतंकवाद किसके शासनकाल में फैला? देश अस्थिर किसके शासनकाल में हुआ। मुंबई में तीन दिन तक आतंकवादी गोलीबारी करते रहे और कांग्रेस सरकारों को सांप सूंघा रहा, समझ नहीं आया कि करना क्या है। कौन जवाबदेह है? और इन सभी बरसों में वामपंथी दल उनके साथ रहे हैं।
पाकिस्तान को नानी याद दिला देंगे -
वैसे खुर्शीद के जिस पाकिस्तान से मोदी और उनकी बीजेपी, अपना रिश्ता ठीक नहीं कर पा रही रही, उसी पाकिस्तान को नानी याद दिला देने के ऐलान, उसी सलमान खुर्शीद की पार्टी के भूतपूर्व महाराज स्वर्गीय श्री राजीव गांधी ने किया था। वो भी लालकिले के प्राचीर से किया था। श्री राजीव गांधी के कहा था कि हम पाकिस्तान को नानी याद दिला देंगे, और पाकिस्तान क्या, उनके जो मां-बाप बने हुए हैं(अमेरिका) हम उनको भी नानी याद दिला देंगे। राजीव जी के ऐसा बोलने पूरा देश पूंछ पर खड़ा हो गया था। खूब हंगामा हुआ था कि कोई प्रधानमंत्री ऐसी भाषा बोल कैसे सकता है। खूब फजीहत हुई थी राजीव गांधी और चापलूसों (सलाहकारों)के उनके कुनबे की...
शायद उनका भाषण सलीम-जावेद संपादित करते हैं ?
कोई प्रधानमंत्री इस तरह, सिनेमाई जुमला कैसे बोलेगा ?
और भी बहुत बक-बक-बक हुआ था...
तो सलमान खुर्शीद की बेशर्मी साफ है, कि अपने ही महाराज की बातें वो भूल गए हैं। महाराज राजीव गांधी जी को भी भारी बहुमत मिला था, वो जो चाहे कर सकते थे। कोई विरोधी नहीं बचा था उनका। वो चाहते तो पाकिस्तान से सारे रिश्ते ठीक कर लेते। इस बावत उनका कोई भी प्रस्ताव, संसद में पास भी हो जाता... बिना विरोध के... लेकिन उस महाराज ने पाकिस्तान को नानी याद दिलाने की बात कही। और खुर्शीद ये भूलकर, मोदी को गाली दे रहे हैं...
खुर्शीद से हमारा कोई सरोकार नहीं, मोदी से है
तो सलमान खुर्शीद भी वैसे ही बोल रहे हैं, जैसे नरेंद्र दामोदर मोदी बोलते हैं। पर खुर्शीद से हमारा कोई सरोकार नहीं अभी, क्योंकि वो अभी किसी पद पर नहीं। भूतपूर्व का मतलब लाश होता है। तो कायदे से उनके कथन को भारत का कथन माना ही नहीं जाना चाहिए। ये उनकी पार्टी का कथन भी नही। अभी उनका कुछ भी कहना, उनकी एकदम व्यक्तिगत राय है।
दरअसल उनके कथन को एक गैरजिम्मेदार, बहके हुए व्यक्ति का कथन माना जाना चाहिए। जिसे पता नहीं कि वो बोल क्या रहा है।
वैसे यही बात मोदी जी के साथ भी है, लेकिन वो हमारे प्रधानमंत्री हैं... और उसने हम जिम्मेदार वक्तव्य और कथन की उम्मीद ही कर सकते हैं। अब बाकी उन्हें अधिकार है, जो चाहे करें इस देश की जनता के सम्मान का।
विदेशों में भारत का मजाक, मोदी ने भी कम नहीं उड़ाया है -
वैसे मोदी जी ने भी भारत के बाहर, भारतीयों की खूब किरकिरी की है, खूब मजाक उड़ाया है भारत का। जैसे बिहार में जाकर उन्होंने मजाक उड़ाया बिहारियों का। उनके आने से पहले देश जंगल युग में जी रहा था। गरीबी, गंदगी और भुखमरी में डूबा था, ये सब क्या था। भारत का महिमागान था, उसे आसमान में बैठा देना था। नहीं क्या?
तो सलमान खुर्शीद की बकवास की आलोचना से, मोदी जी के कथन का बचाव दुरुस्त नहीं।
सलमान खुर्शीद की बात पर तो भारत में प्रतिक्रिया ही नहीं होनी चाहिए। चर्चा तक नहीं। उनकी बात का अभी कोई मोल नहीं। अभी वो एक आम भारतीय से ऊपर नहीं हैं। उनकी बात का वही मोल है, जो राह चलते किसी खोमचेवाले की बात का हो सकता है। तो स्कूल में दिए गए एक बच्चे के भाषण और उनके भाषण में इस वक्त कोई फर्क नहीं है। लेकिन मोदी जी का कथन बच्चे का भाषण नहीं है अभी। वो भारत के प्रधानमंत्री हैं।
भक्तों को शोभा देता होगा कि उनका नेता, मीसा भारती से बहस करने लगे। मुझे एकदम नहीं भाता कि मेरे प्रधानंमंत्री की बातों में वजन नहीं हो। वो हल्की, फूहड़ और बेमतलब बातें बोलें।
अपने प्रधानमंत्री से ऐसी अपेक्षा, अपराध है क्या?

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